Thursday, August 6, 2009
वो वक़्त भी विचित्र था जब नेत्रों में सुखद चित्र था..
भय से दूर चिन्तामुक्त मेरा मन कोमल और पवित्र था!!
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मुझमें जो असल शख्स है उसके विचारों का ये अक्स है!!
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